Thursday, November 11, 2010

मान भी जाओ बहू-2

लेखिका : कुसुम
आपकी कुसुम का चौड़ी टांगों, मदहोश जवानी से अंतर्वासना के पाठकों को एक बार फिर से प्यार एंड नमस्कार ! अपने बारे में ज्यादा न बताती हुई क्यूंकि अपनी कहानी के पहले भाग में मैंने अपना पूरा ब्यौरा दे दिया था।
सो दोस्तो, पति के ऑस्ट्रेलिया जाने के बाद किस तरह मेरा रिश्ता अपने ससुर जी से बन गया, यह आपने पढ़ लिया। अब तो मानो मैं उनकी दूसरी बीवी की तरह रहती ! हैरानी वाली बात थी कि ससुर जी में इस उम्र में एक जवान लड़के से ज्यादा जोर, दम था कि उन्होंने एक कमसिन, कामुक, आग जैसी जवान बहू को संभाल रखा था।
दोस्तो, जेठ जी को भनक पड़ गई और फिर उनकी मेरे ऊपर निगाहें टिक चुकी थी। ऊपर से जेठानी के जनेपे के लिए उनके पीहर भेज दिया जिससे उनकी वासना और बढ़ गई। करते भी क्या ! औरत पेट से थी तो लौड़े का क्या हाल होगा ! लेकिन मुझे तो ससुर जी ही नहीं छोड़ते थे लेकिन मेरा झुकाव अब जेठ जी की तरफ भी था, चाहती थी कि उनकी प्यास बुझाऊँ ! आखिर मौका मिल गया !
एक दिन ऐसा जरूरी काम पड़ा कि ससुर जी को सासू माँ के साथ बाहर जाना ही पड़ा और दोपहर को मैं घर में अकेली थी। लेकिन जेठ जी सुबह से घर नहीं थे, शायद उन्हें मालूम नहीं था कि मैं अकेली हूँ, वरना वो मौका कहाँ छोड़ते ! कोशिश ज़रूर करते !
मैंने उनके मोबाइल पर मिस-कॉल दे दी। उसके बाद वो फ़ोन पर फ़ोन करने लगे लेकिन मैंने नहीं उठाया। आधे घंटे के अंदर मेरा अंदाजा और तीर सही जगह लगा और वो घर आ पहुंचे। मैं अपने कमरे में कंप्यूटर पर बैठी सर्फिंग कर रही थी, बारीक सफ़ेद नाइटी अंदर काली ब्रा-पेंटी पहन रखी थी।
कुसुम ! तुमने कॉल की थी ?
मैं पलटी- नहीं तो ! वो गलती से पॉकेट में बटन दब गया होगा !
ठीक है ! कहाँ हैं सब ? अकेली हो आज ?
जी हाँ अकेली हूँ ! बैठो ! अभी चाय लेकर आती हूँ !
नहीं भाभी !
उन्होंने मेरी कलाई पकड़ ली, खींच कर मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरे गुलाबी होंठों का रसपान करने लगे। मेरी और से ज़रा सा विरोध ना देख उनकी हिम्मत बढ़ चुकी थी।
बहुत सुन्दर हो भाभी जान ! बहुत आग है आप में ! बहुत तड़पाया है आपने अपनी जवानी से मुझे ! हर पल गोली मारती रहती हो !
मैं भी तो आपकी वासना आपकी आँखों में पढ़ती रही हूँ, लेकिन पहल नहीं कर पा रही थी !
ओह मेरी जान ! मुझे भी सब मालूम था ! मैं भी थोड़ा सा झिझक रहा था ! मुझे मालूम है तूने अपनी मर्ज़ी से मुझे मिस-कॉल दी थी !
और यह कहते ही वो मुझ पर सवार होने लगे। मैंने एक पल में उनके बटन खोल उनकी कमीज़ अलग कर दी और उन्होंने मेरी नाईटी उतार फेंकी और ब्रा के ऊपर से मेरे मम्मे दबाने लगे। मैं अश अश कर रही थी। मैंने उनकी बेल्ट भी खोल दी, अपने हाथों से जींस का बकल खोल नीचे कर अंडरवीयर के ऊपर से ही उनके लौड़े को मसलने लगी। उनकी आग बढ़ने लगी, लौड़ा तन कर डण्डा बन चुका था, कितना बड़ा हथियार था !
मेरी चूत में कुछ-कुछ होने लगा। सिहरन सी उठने लगी, जवानी बेकाबू हो रही थी। उन्होंने मेरी ब्रा उतार मेरे दोनों मम्मों को बारी बारी खूब चूसा। मैं नीचे बैठ गई, उनकी पूरी जींस शरीर से अलग कर उनके लौड़े को आराम से चूसने लगी।
कितना बड़ा है जेठ जी !
हां रानी ! इसको तेरे जैसी रांड पसंद है ! तेरी जेठानी तो ठंडी औरत है !
वो मेरे चूसने के अंदाज़ से बहुत खुश थे, मुझे बाँहों में उठा कर बिस्तर पर डाल लिया और मेरी टाँगें चौड़ी करवा ली। बीच में बैठ कर पहले प्यार से मेरी पूरी चूत पर हाथ फेरा, फिर मेरे दाने से थोड़ी छेड़छाड़ करने लगे। मैं बेकाबू हो रही थी, जल्दी ही उन्होंने लगाम लगा ली और अपना मोटा लौड़ा मेरी चूत में डालकर मुझे चोदने लगे।
अह अह और तेज़ करो जेठ जी ! जोर जोर से मारो ! अपनी जवान भाभी की जवान जवानी लूट लो !
यह ले यह यह साली कुतिया कब से तेरा आशिक हूँ ! तू है कि मेरे बाप से चुदवाती है !
क्या करूँ ! वो नहीं छोड़ते मुझे ! तेरे बाप में तेरे जितना दम ही है !
यह ले कमीनी ! अब से मुझे भी दिया करेगी ?
हाँ दूंगी ! लो मेरी और मजे से लो !
चल घोड़ी बन ! तेरी फाड़ता हूँ गांड !
घोड़ी बना मेरी गांड मारने लगे !
हाय दुखती है !
तब फिर से चूत में डाल मेरी लेने लगे। पच्चीस मिनट की लम्बी चुदाई के बाद उनका घोड़ा छूट गया और हांफने लगा।
पूरी दोपहर जेठ से चुदवाया और फिर दोनों के साथ में अपनी जवानी लूटने लगी। अगले बार मुझे मासिक-धर्म नहीं हुआ। ससुर जी ने मुझे पेट से कर दिया।
सासू माँ बहुत खुश हैं !
उसके बाद मेरे अपने पड़ोसी के लड़के से संबंध बने !
वो अगली बार बताउंगी।

मान भी जाओ बहू

खिका : कुसुम
मेरा नाम कुसुम है और मैं मेरठ की रहने वाली हूँ, उम्र 24 साल, गोरा रंग, कसा हुआ बदन, किसी भी लौड़े में जान डाल सकती हूँ, 5 फुट 5 इंच लंबी, कसी हुई छातियाँ, पतली सी कमर और गोल गोल चूतड़ !
अब मेरी तरफ से Mobsex के हर एक पाठक को मेरा प्रणाम ! Mobsex वेबसाइट एक हाउस वाइफ के लिए बेहद ज़बरदस्त है। अपना काम निपटा कर दोपहर को रोज़ इसमें छपने वाले एक एक अक्षर का आनंद लेती हूँ। यह  वेबसाइट मुझे मेरे ससुर जी ने पढ़वाई थी, तब से मैं इसकी कायल हो गई थी।
ठीक दो साल ही पहले मेरी शादी विवेक नाम के युवक से हुई थी। मैं एक बहुत कामुक और बहुत ही चुदक्कड़ लड़की हूँ। शादी से पहले न जाने कितनी बार अपनी बुर चुदवाई थी लेकिन जो सोचा था वो जीवन में नहीं मिल पाया- पति के रूप में ज़बरदस्त मर्द और उसका मोटा लंबा लौड़ा जो रोज़ रात को मुझे ही ठंडी करे !
लेकिन विवेक का ना तो बड़ा था और ना ही मुझे किनारे लगाने लायक ! धोखा हुआ था मेरे साथ ! लेकिन इतना ज़रूर था कि मेरा भेद नहीं खुल पाया क्यूंकि उस से तो मुश्किल से मेरे पहले से चुदी होने का राज नहीं खुला क्यूंकि अगर मैं सील बंद होती तो वो मेरी सील तोड़ ही नहीं पाता।
शादी के छः महीने बीत गए, सासू माँ अब मुझसे बच्चे की उम्मीद लगाए बैठी थी और फिर एक दिन मेरे पति का ऑस्ट्रेलिया का वीसा लग गया।
सासू माँ ने मुझसे कहा- अब वीसा लग गया है, उससे कहना कि जाने से पहले तुझे पेट से करके जाए !
मेरे ससुर जी फौजी रह चुके थे और अब एक कंपनी में गार्ड थे लेकिन फिर वो नौकरी छोड़ घर आ गए। यह बात ससुर जी ने सुन ली क्यूंकि मैंने उन्हें दरवाज़े के बाहर खड़ा देखा था। मुझे देख वो मुस्कुरा दिए और चले गए। ऊपर से मैं उन दिनों पहले ही बहुत प्यासी थी।
फिर एक दिन पति देव तो फ्लाईट पकड़ सिडनी पहुँच गए। वो चले गए और वहाँ जाकर मेरे पेपर्स भी तैयार करवाने लगे। उधर अब ससुर के इलावा मेरे जेठ की नियत मुझ पर खराब थी। हालाँकि वो दूसरे घर में रहता था लेकिन पति के जाने के बाद वो आने के बहाने ढूंढता। ससुर जी शायद डरते थे कि कहीं मैं विरोध ना कर दूँ !
एक रात मेरा सब्र का बांध टूट गया। मेरे ससुर और मैं दोनों घर में अकेले थे और मैं कई दिनों से चुदाई चाहती थी। मैं ससुर जी के कमरे में गई, जीरो वाट का दूधिया बल्ब जल रहा था। ससुर जी सीधे लेट कर सोये थे लेकिन उनके लौड़े ने तो पजामे को तम्बू बना रखा था शायद वो नाटक कर रहे थे।
मैं बिस्तर के बिल्कुल पास गई, घुटनों के बल बैठ कर हाथ उनके लौड़े की ओर बढ़ा दिया। लेकिन न जाने क्या हुआ, मैं डर से वहाँ से वापिस चली आई। नींद नहीं आ रही थी, बार-बार ससुर जी का पजामे में खड़ा लौड़ा सामने आ जाता। तभी मैंने अपनी सलवार का नाड़ा खोल कर पैंटी में हाथ डाल कर देखा, कच्छी गीली हो गई थी। मुझे सीधे लेट नींद नहीं आती, एक तकिये को बाँहों में लेकर उलटी लेट सोने की कोशिश करने लगी।
अभी आँख लगी थी कि किसी का हाथ मेरी गांड की गोलाइयों पर फिरने लगा। मैं समझ गई थी लेकिन कुछ न बोली। मेरी सलवार का नाड़ा खींचा गया, गांड नंगी करके कच्छी के ऊपर से सहलाने लगे। मेरा सब्र टूट रहा था। पापा ने गांड को चूमना चालू कर दिया। मैं नाटक कर मदहोश हुई पड़ी थी। वो मेरी बग़ल में लेट गए और पूरी सलवार नीचे तक सरकाने की कोशिश की।
फिर बोले- अब मान भी जाओ बहू ! खुद तो मेरे कमरे में इतने करीब आई और वापिस चली आई ! अब जब हम चल कर खुद आये हैं तो सोने का नाटक ?
मैं पलटी, कॉलर से पकड़ कर ससुर जी को अपने ऊपर गिरा दिया- आप भी तो सोने का नाटक कर रहे थे ! अब तो मुझे कह रहे हो !
वो मेरे गुलाबी होंठों को चूसने लगे। वाह ! कितने प्यार से चूस रहे थे ! मैं उठी और उनकी कमीज़ उतार दी। क्या मर्दानी छाती थी ! मैं वहाँ चूमने लगी, बालों से खेलने लगी। सारी शर्म-सीमा ना जाने कहाँ गायब हो गई थी।
कुछ ही पलों में उन्होंने मेरे बदन से एक एक करके सारे कपड़े उतार फेंके। मुझे अपनी मजबूत फौजी बाँहों में जकड़ लिया, कभी मेरी जवानी का रस पीते तो कभी मेरी जांघों की चूमा-चाटी करते। अब मेरा सब्र जवाब देने लगा और मैंने उठ कर उनको बिस्तर पर धक्का दिया, उन पर गिरते हुए उनके अण्डर्वीयर को उतार फेंका और उनका फौलादी लौड़ा बाहर निकाल लिया। और कुछ देर पहले जिसको पजामा फाड़ने पर उतरे हुए को देखा था, सोचा था, यह उससे भी ज्यादा मोटा लम्बा था।
मैंने झट से चूसना शुरु किया, वो आहें भर रहे थे, मेरे मम्मे दबाते जा रहे थे। मेरी जवानी के रंग में ससुर जी रंग के डुबकियाँ लगाने लगे। फिर न उनसे रुका गया, न मुझ से ! और मेरी टाँगें आखिर चौड़ी करवा ही ली उन्होंने ! मैंने नीचे हाथ लेजाकर खुद ठिकाने पर रखवा दिया और मेरा इशारा पाते ही ससुर जी ने झटके से लौड़ा अन्दर कर दिया।
हाय मजा आ गया ! कितनी भीड़ी गली है ! कमबख्त मेरा नाम मिटटी में मिला रहा है ! मेरा अपना बेटा जिससे दरार खुल न सकी !
तो आप फाड़ डालो ससुर जी !
यह ले साली, देख नज़ारा फौजी की चुदाई का ! ले !
वो तेज़ तेज़ धक्के लगने लगे और मुझे स्वर्ग दिखने लगा। बीस पच्चीस मिनट मुझे कभी इधर से, कभी उधर से, ऊपर-नीचे कितने तरीकों से सम्भोग का असली सुख दिया और फिर अपना बीज मेरी चूत में निकाल मुझ से चिपक गए।
पूरी रात ससुर जी के साथ बिताई। सुबह आंख खुली तो नंगी उनकी बाँहों में सो रही थी। सुबह चली तो लगा कि कल रात मानो पहली बार चुदवाया था।
फ़िर आये दिन मौका पाते ही हम बंद कमरे में रास-लीला रचाने लगे। अब जेठ जी को ना जाने कैसे हम पर शक हो गया।
एक रोज़ दोपहर को जब घर में मैं और ससुर जी थे और मैं यह सोचकर कि और कोई नहीं है घर में, चली गई ससर जी के कमरे में !
जब मैं निकली ससुर जी के कमरे से, वो भी जालीदार नाइटी और उसके नीचे कुछ न पहना था जिससे मेरे जवान मम्मे, कड़क हुए चुचूक साफ़ दिख रहे थे और ऊपर से सलवटें पड़ी हुई देख जेठ जी मुस्करा दिए। मुझे क्या मालूम था कि जेठ जी वहीँ मौजूद थे, मुझे देख उनकी आँखों में वासना चमकने लगी। मैं शरमा कर निकल गई।
जेठ जी ने जेठानी के जनेपे के लिए उनके पीहर भेज दिया जिससे उनकी वासना और बढ़ गई। करते भी क्या ! औरत पेट से थी तो लौड़े का क्या हाल होगा !
मांजी सा ने मुझे रोज़ तीनों वक़्त का खाना भिजवाने को कह रखा था। मैं पहले नौकर से कहती थी लेकिन फिर खुद लेकर जाने लगी।
उसके बाद क्या हुआ जानने के लिए Mobsex का साथ मत छोड़ना !
मिलतें हैं जल्दी ही !
आपकी कुसुम

एक जल्दी वाला राउंड

षक : पुलकित झा
आज स्कूल में अचानक जल्दी छुट्टी हो गई तो मैं घर आ गया। जैसे ही दरवाजे के पास पहुँचा कि :
आई...ई... मान जाओ न…यह दीदी की आवाज थी।
मैं चौंक पडा…मैंने दरवाजा खटखटाने का इरादा त्याग दिया और दबे पाँव दरवाजे तक पहुँच गया और सुनने लगा। अन्दर दीदी और किसी मर्द की आवाज आ रही थी।
उचक क्यों रही है……कोई पहली बार दबा रहा हूँ क्या…पुच्च पुच्च पुच्च... !
इतना जोर से क्यों दबाते हो…? दर्द नहीं होता…?
इतने समय के बाद मिलेगी तो सब्र कैसे होगा…!
आप ही तो एक साल के बाद आये हो… !
आह्ह्ह्…मेरी जान्… याद है… पिछली बार कैसे छत पर चोदी थी ! पुच्च पुच्च…
सब याद है…कुछ बिछाया भी नहीं था… पूरी छिल गई थी पीछे से… !
सच… पुच्च् पुच्च … पर बहुत मजा आया था… ! सच पूछे तो तुझे चोदने बाद तेरी बहन को चोदने में बिलकुल भी मजा नहीं आता… !!! तुझे भी तो आता है न … ??
हाँ…पर थोड़ा धीरे दबाओ…आईइ……लगती है…
चुदते समय तो नहीं होता दर्द तुझे…
उस समय तो मैं दूसरी दुनिया में होती हूँ … फ़िर कुछ देर शान्ति रही…
चल अब बैडरूम में चलें……
अभी नहीं … भाई आने वाला होगा…
अभी तो दो ही बजे हैं… वो तो चार बजे आयेगा…
जल्दी भी आ सकता है… रात को सबके सोने के बाद आउंगी …
ज्यादा नखरे मत कर …
मान जाओ…… पूरी रात चोदना फिर…
तो एक जल्दी वाला राउंड कर लेते हैं… लंड भरा हुआ है… आह्ह आह्ह
बीच में मत छोड़ देना मुझे……
आज तक छोड़ा है क्या… बहन की लौड़ी … हमेशा तेरी चूत खाली करके झड़ा है…
फ़िर उनके जाने की आवाज आई तो मैं दौड़कर घर के पीछे पहुँच गया जहाँ की खिड़की से बैडरूम के अन्दर सब दिखता था। दोनों एक दूसरे की कमर में हाथ डाले कमरे में आये।
ओह… ये तो समीर जीजाजी हैं… मामा की बेटी के पति…तो दीदी इनसे भी ??? हे भगवान… इस लड़की ने कोई लंड छोड़ा भी है क्या… !!
और आते ही जीजाजी ने उसे बाँहों में भींच लिया और फ़िर उनके होठ चिपक गये। वे हाथों से उसकी चूची, कमर व गांड को जोर जोर से भींच रहे थे। वह बिलबिला रही थी …
आह्ह्ह्……ऐसे क्यों अकुला रहे हो…मैं कहीं भागी जा रही हूँ क्या… दीदी हाँफ़ते हुए बोली।
… और फ़िर जब जीजाजी ने उसे नंगा करना शुरू किया तो…
पूरे कपड़े नहीं… अभी तो ऐसे ही चोद लो … रात में चाहे जैसे चोदना…
ज्यादा नखरे मत कर बहनचोद .…अभी काफ़ी वक्त है…
और फ़िर आनन फ़ानन दोनों नंगे हुए और कस कर फ़िर लिपट गये। लिपटे लिपटे जीजू ने उसे पलंग पर पटक लिया और उसके ऊपर आ गये !फ़िर रगड़ना शुरू कर दिया। वो भी बराबर सहयोग कर रही थी। आठ इंच का लंड चूत की गहराई नापने के लिये बेताब था तो चूत भी उसका घमंड तोड़ने के लिये आतुर थी।
कैसे चुदवायेगी मेरी जान…
शुरूआत तो सीधे ही करो…
और दीदी ने टांगे फ़ैला दी तो जीजू ने लंड चूत पर टिका दिया और फ़िर होठों पर होंठ जमाकर चूसना शुरू किया तो सीमा ने भी हाथ से लंड को पकड कर चूत पर सैट किया और चूतड़ उचकाए… चूत ने लंड को अपने भीतर समा लिया…
फिर सीमा ने अपनी टांगों में जीजू को लपेट लिया… लंड जड़ तक समा गया।
थोड़ी देर प्यार करने के बाद जीजू ने पोजीशन ली और दनादन ठोकना शुरू कर दिया। वह आह्ह्ह आह्ह्ह करती रही और चूत ठुकती रही… बीच बीच में वे उसे चूम भी रहे थे। दीदी भी अब गर्म हो चुकी थी।
फ़िर वे अलग हुए और उन्होंने दीदी को हाथ पकड़ कर खड़ा किया और पलंग की ओर मुँह करके झुका दिया। दीदी ने हाथ पलंग पर जमा दिये। उसकी चूत मेरी तरफ़ थी। जीजाजी उसकी पैंटी से पहले चूत पौंछी और फ़िर अपने आठ इंच के लंड को पीछे से चूत पर टिकाया और एक जोरदार धक्का दिया।
दीदी बिस्तर पर गिर गई…
थोड़ा आराम से डालो ना जीजू राजा …
उन्होंने उसे फ़िर उठाया और इस बार थोड़ा आराम से लंड चूत में घुसेड़ा और फ़िर चोदने लगे।
वह भी चूतड़ हिला हिला कर धक्के मार रही थी- आह्ह्॥ मेरे प्यारे जीजू … और जोर से…
ले मेरी जान ! तेरी मस्त चूत को फ़ाड डालूँगा आज…
और इस तरह उसने पहले उसकी चूत पीछे से खूब ठोकी और फ़िर उसे सीधे लिटा कर खूब पटक पटक के चोदा। काफ़ी देर बाद वे झड़े और फ़िर लंड डाले ही उसके ऊपर लेट गये।
मैं वापस लौट गया और फ़िर काफ़ी देर बाद आया।

मेरी मां चुद गई

प्रेषिका : दिव्या डिकोस्टा
रात आने को थी... मेरा दिल धड़कने लगा था। मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था कि मेरी मां मेरे सामने ही चुदेगी ! कैसे चुदेगी ... आह्ह्ह चाचा का कड़क लण्ड भला अन्दर कैसे घुसेगा ? यह सोच कर तो मेरी चूत में भी पानी उतरने लगा था।
रात का भोजन मैं और मम्मी साथ साथ कर रहे थे।
"मम्मी, एलू अंकल अच्छे है ना... "
"हूं, बहुत अच्छे है ... प्यारे भी हैं !"
"प्यारे भी हैं ... क्या मतलब ... यानि आपको प्यारे हैं ?"
"अरे चुप भी रह ना, वो हमारा कितना ख्याल रखते हैं ... घर को अपना ही समझते हैं ना !"
"मम्मी ! उन्हें यहीं रख लो ना ... देखो ना उनका अपने अलावा और कौन है ? उनके तो कोई बच्चा भी नहीं है, बिल्कुल अकेले हैं... वो तो मुझे भी बहुत प्यार करते हैं।"
"हां, जानती हूँ... " फिर मुझे वो मुस्करा कर देखने लगी। खाना खाकर मैं अपने कमरे में चली आई। कुछ ही देर में चाचा आ गये। मम्मी ने मुझे कमरे में झांक कर देखा, उन्हें लगा कि मैं सो गई हूँ। वो चुपचाप अपने कमरे में चली गई और कमरा भीतर से बन्द कर लिया। मैंने अपने लिये लाईव शो का इन्तज़ाम पहले से ही कर रखा था। उनके दरवाजा बन्द करते ही मैं चुपके से कमरे से बाहर आ गई और खिड़की को ठीक से देखा। अन्दर का दृश्य साफ़ नजर आ रहा था। मेरा दिल धड़क रहा था कि मां की चुदाई होगी।
मां धीरे धीरे शरमाते हुए अंकल की तरफ़ बढ़ रही थी। उनके पास आ कर वो रुक गई और अपनी बड़ी बड़ी आंखों से उन्हें निहारने लगी।
"माया, तुम कितनी सुन्दर हो ... "
मां ने नजर नीची कर ली। अंकल ने आगे बढ़ कर मम्मी को प्यार से गले लगा लिया। मां तो जैसे उनसे चिपट सी गई। दोनों के लब एक दूसरे से मिल गये।
गहरे चुम्बनों का आदान प्रदान होने लगा। मां की लम्बाई चाचा के बराबर ही थी, मां के भारी भारी चूतड़ों को अंकल ने दबा दिया। मां के मुख से एक प्यारी सी आह निकल पड़ी। पजामे में से अंकल का लण्ड उभर कर बाहर निकलने हो हो रहा था। मम्मी ने एक बार नीचे उनके लण्ड को देखा और अपना पेटीकोट उनके लण्ड से टकरा दिया। अब वो अपनी चूत वाला भाग लण्ड पर दबा रही थी।
अंकल ने अपने दोनों हाथों से मम्मी की चूचियों को सहला कर दबा दिया। मम्मी सिमट सी गई।
"माया, मेरे लण्ड को प्यार करोगी... ?"
मम्मी धीरे से नीचे बैठ गई और उनके पजामे का नाड़ा खोल दिया। उसे धीरे से नीचे उतार दिया। अंकल का लण्ड बाहर आ गया। सुपाड़ा पहले से ही खुला हुआ था। मां ने मुस्करा कर ऊपर देखा और लण्ड को अपने मुख में डाल दिया। अंकल ने मस्ती में अपनी आंखें बन्द कर ली। अंकल के हाथ मां के ब्लाऊज को खोलने में लगे थे। मम्मी ने उनका लण्ड चूसना छोड़ कर पहले अपना ब्लाऊज उतार दिया।
हाय रे ! मम्मी के उरोज तो सच में बहुत सधे हुये थे। हल्का सा झुकाव लिये, चिकने और अति सुन्दर।
मम्मी ने फिर से उनका लण्ड अपने मुख में ले लिया और चूसने लगी। अंकल के हाथ मम्मी के बालों में चल रहे थे, उनके बाल खुल गये थे। उन्होने मां को अब उठा कर अब खड़ा कर लिया और उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल कर उसे नीचे गिरा दिया।
"माया, मुझे भी आप अपनी चूत को प्यार करने की इजाजत देंगी?"
पहले तो मां शरमा गई। फिर वो बिस्तर पर लेट गई और अपनी दोनों टांगें ऊपर खोल ली।
"हाय ... माया ... इतनी चिकनी, इतनी प्यारी ... लण्ड लगते ही भीतर फ़िसल जाये !"
"ऐसे मत बोलो, बस इसे चूम लो, फिर चाहे जो करो। भले ही उसे अन्दर उतार दो !"
मां को चुदने की बहुत लग रही थी, पर अंकल ने अपना मुख मम्मी की चूत पर लगा दिया। उनके दाने को उनके होंठों ने मसल दिया। मम्मी अपनी चूत उछालने लगी। मेरी चूत में भी यह देख कर पानी उतर आया। मैं अपने कमरे में से जा कर अंकल का दिया हुआ डिल्डो उठा लाई। पहले तो मैं अपनी चूत को दबाने लगी।
मां तो खुशी के मारे जैसे उछल रही थी। पर अंकल चूत से चिपके हुये उसका रस चूसने में लगे थे।
"अब तड़पाओ मत ... जैसा मैं कहूँ वैसा करो !"
"पीछे घूम जाओ, तुम्हारी चिकनी गाण्ड पहले मारूंगा !"
"ओह, तुम्हें गाण्ड मारना अच्छा लगता है... कोई बात नहीं ... दोनों तरफ़ छेद है, किसी को भी चोद दो ! पर पहले मुझे मुठ मार कर दिखाओ ना !"
"ओह, जैसी माया जी की इच्छा... "
चाचा नीचे बैठ गए और मुठ मारने लगे। मां बहुत ध्यान से मुठ मारते हुये देखने लगी। मां के मुख से बीच बीच में सिसकी भी निकल जाती थी। वो अपने कठोर लण्ड को मुठ मारते रहे और मां ने अपनी चूत घिसना चालू कर दिया।
जैसे ही अंकल का वीर्य छलक पड़ा। मां के मुख से भी सीत्कार निकल पड़ी।
"इसमें आपको बहुत मजा आता है ना... ?" उनके लण्ड को मां ने हिलाया, मां ने अंकल को अपने चिकने बोबे से लगा दिया और उसे उनकी छाती पर घिसने लगी।
"माया, अब तुम्हारी बारी है ... चलो शुरू हो जाओ !"
मां भी जमीन पर बैठ गई और अपनी चिकनी चूत को पहले तो सहलाने लगी। फिर चूत की धार को मसलने सी लगी। फिर मां ने अपना दाना उभार कर देखा और उसे मसलने लगी। फिर उन्होंने अपनी गीली चूत में अपनी अंगुली घुसा ली और आह भरते हुये हस्तमैथुन करने लगी। मां जल्दी ही झड़ गई, वो शायद पहले ही उत्तेजित थी।
मां के झड़ते ही अंकल मां की चूत का रस चूसने लगे। मां ने उन्हें अपनी जांघों के बीच दबा लिया।
"अब देखो, मैं तैयार हूँ, अब मैं तुम्हारी जम कर गाण्ड चोदूंगा... मजा आ जायेगा !"
मां ने घोड़ी बन कर अपनी सुडौल गाण्ड पीछे की ओर उभार दी। अंकल तो गाण्ड मारने में उस्ताद थे ही। उन्होंने धीरे से लण्ड गाण्ड में डाल दिया और मां मस्त हो गई। मुझे देखने में बहुत आनन्द आ रहा था। मम्मी की गाण्ड अंकल ने बहुत देर तक बजाया। मम्मी भी अंकल के स्खलित होने तक गाण्ड चुदाती रही।
मम्मी की गाण्ड मार कर अंकल सुस्ताने लगे।
"जूस पियोगे या दूध लाऊँ?"
"अभी तो दूध ही पियूंगा, फिर जूस... "
मां जैसे ही उठी दूध लाने के लिये, चाचा ने उन्हें फिर से गोदी में खींच लिया और उनकी चूचियों को अपने मुख से दबा लिया।
"कहां जा रही हो, दूध नहीं पिलाओगी क्या ?"
और मां को गुदगुदाते हुये दूध पीने लगे।
हुंह ... मां के खूब चूस चूस के पी रहा है ... मेरे तो चूसता ही नहीं है !
मां गुदगुदी के मारे सिसकियाँ भरने लगी।
"बहुत प्यारे हो एलू तुम तो ... कैसी कैसी शरारते करते हो... "
दोनों नंगे ही एक दूसरे के साथ खेल रहे थे... खेलते हुये उन दोनों में फिर से आग भरने लगी थी। अंकल का लण्ड फिर से फ़ुफ़कारने लगा था।
"अब देरी किस बात की है?" मां ने अनुरोध किया।
"बस हो गया ना ... अब कल के लिये तो कुछ छोड़ो !"
"बस एक बार, मेरे ऊपर चढ़ जाओ ... मुझे शांत कर दो !"
"कहीं कुछ हो गया तो ... ?"
"कुछ नहीं होगा, मेरा ऑप्रेशन हो चुका है ... अब तो आ जाओ !"
अंकल का चेहरा खिल गया। मां ने अपनी दोनों खूबसूरत सी टांगें उठा ली। अंकल उन टांगों के बीच में समा गये। कुछ ही पलों में अंकल का मोटा लण्ड मां की चूत को चूम रहा था। चाचा का लण्ड मां की चूत में घुसता चला गया। मां खुशी से झूम उठी। मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया, मैंने डिल्डो को धीरे से अपनी चूत में घुसा लिया, मुझे भी एक मीठी सी गुदगुदी हुई।
मेरी मां अपनी टांगें ऊपर उठा कर उछल उछल कर चुदवा रही थी। मेरा हाल इधर खराब होता जा रहा था। मां की मधुर चीखें मेरे कानों में रस घोल रही थी। दोनों गुत्थम-गुत्था हो गये थे। कभी अंकल ऊपर तो कभी मम्मी ऊपर ! खूब जम कर चुदाई हो रही थी। मां को इस रूप में मैंने पहली बार देखा था। वो एक काम की देवी लग रही थी। लगता था जिन्दगी भर की चुदाई वो दोनों आज ही कर डालेंगे।
तभी दोनों का जोश ठण्डा पड़ता दिखाई देने लगा। अरे ! क्या दोनों झड़ चुके थे? सफ़र की इति हो चुकी थी। वो दोनों झड़ चुके थे।
मैं अपने कमरे में आ गई और चूत में डिल्डो को फ़ंसा कर अन्दर बाहर करने लगी। साथ में अंकल को गालियाँ भी देती जा रही थी- साला, बेईमान, झूठा ! मम्मी को तो बुरी तरह चोद दिया और मुझे... हरामी घास भी नहीं डालता है।
अब किसे क्या बताऊं, मैं भी तो जवान हूँ, मुझे भी तो एक मोटा, लम्बा, कड़क ... हाय, हां ... बस आपके जैसा ही... ऐसा ही तो लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ना है। प्लीज आईये ना !!!


चचेरा देवर

प्रेषिका : संजू
प्रिय पाठको,
मैं 29 साल की एक स्वस्थ और मस्त औरत हूँ। मेरी शादी 1998 में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुई।
बात उन दिनों की है जब शादी के कुछ दिनों बाद मेरे पति जालंधर अपनी नौकरी पर चले गए जो किसी प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। उनके जाने के कुछ दिन तो ठीक-ठाक रहा लेकिन फिर मेरी कामेच्छा बढ़ने लगी और मेरा चुदवाने का मन होने लगा।
मेरी ससुराल में सास-ससुर, जेठ-जेठानी और उनके तीन बच्चे थे, कोई और नहीं था।
तभी दो दिन बाद मेरा चचेरा देवर अपने घर आया जो कहीं बाहर नौकरी करता था। उसकी शादी अभी नहीं हुई थी। चचेरा देवर बहुत ही मिलन सार है। वह जब भी घर आता तो सभी लोगों से जरूर मिलता है। चूँकि मेरी शादी में वह नहीं आ पाया था इसलिए मुझसे भी मिलने चला आया।
जब मैंने पहली बार उसे देखा तो मैं खुश हो गई मेरी नीयत उसी समय बिगड़ गई। लेकिन मैं उससे अनजान थी और वो भी मुझसे पहली ही बार मिला था। थोड़ी देर तक हम दोनों बातचीत करते रहे और थोड़ी देर बाद उसने मजाक किया- भाभी अगर आपकी कोई बहन और हो तो मेरा भी नंबर है।
और कुछ देर के बाद वह चला गया। मैं उसके बारे में रात भर सोचती रही।
अगले दिन दोपहर में वह फिर मिलने आया, मेरी सास कहीं बाहर गई थी। घर में जेठानी अपने बच्चों को सुला रही थी। वह मेरे पास आया और बैठ कर बातें करने लगा। मैंने देखा कि उसका ध्यान मेरे ब्लाउज पर है। जहाँ से वह मेरी चूचियों को देख रहा था।
मैंने पूछा- क्या देख रहे हो राजीव ?
वह चौंक गया और बोला कुछ नहीं। मेरा मन तो पहले से चुदवाने को था, मैंने अपनी साड़ी थोड़ी खिसकाई, उसे मजा आ गया और वह बदमाश हो गया।
उसने तुरंत मेरी चूचियाँ पकड़ ली और मैं राजीव से लिपट गई। उसने मेरे होठों को चूमना शुरु कर दिया। मैं गर्म होने लगी। मेरे पति का लंड मोटा तो था लेकिन वह जल्द ही झड़ जाते थे। मैं चुदवा कर भी प्यासी थी। अब मेरा हाथ राजीव की पैन्ट की जिप की तरफ बढ़ा। उसका लंड बाहर आने को बेताब हो रहा था। उसने मेरे ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्रा के ऊपर से मेरी चूचियाँ मसलने लगा। मुझे मजा आ रहा था, मैं जोर जोर से उसका लंड मसल रही थी।
उसने धीरे से मेरा ब्लाउज और साड़ी दोनों ही उतार दिए और मैंने उसकी पैंट और टी-शर्ट।
अब राजीव केवल अंडरवियर में था और मैं पेटीकोट और ब्रा में। मैंने अपने पेटीकोट को खुद ही उतार दिया। राजीव ने मेरी चूचियाँ दबाते-दबाते मेरी चूत में हाथ लगाया, मेरी चूत गीली थी। राजीव की सांसें तेज हो गई। वो मेरी ब्रा और पैंटी उतार कर मुझसे जोर से लिपट गया।
मैंने उसका अंडरवियर उतार दिया और बोली- देवर जी, जल्दी करो मेरा धैर्य जवाब दे रहा है।
उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और खुद मेरे ऊपर लेट कर अपने लंड का गुलाबी सुपाड़ा मेरी चूत की फांकों में डालने की कोशिश करने लगा लेकिन बिना अनुभव के उसका लंड मेरी चूत में नहीं जा सका। तब मैंने उसकी मदद की और उसका लंड पकड़ कर मैंने सही रास्ता दिखाया।
रास्ता पाते ही राजीव तो बड़ा ही ताकतवर निकला और मुझे धकाधक चोदने लगा। मुझे मजा आने लगा राजीव ने 40 मिनट तक मेरी चुदाई की, मेरी चूत का उसने पूरा मजा लिया। इस दौरान मैं दो बार झड़ चुकी थी।

रंग में संग

प्रेषिका : विधि गुप्ता
मेरा नाम विधि है। यह मेरी पहली कहानी है और सच्ची कहानी है। अगर आप इस कहानी को पसंद करेंगे तो मैं और भी कहानी लिखूँगी।
मैं मुंबई में रहती हूँ, मेरे पापा रेलवे में अधिकारी हैं। हमारे परिवार में पापा-मम्मी और मैं ही हूँ। मेरी परवरिश अच्छी तरह से हुई है। अब सेक्स के बारे में मैं क्या बताऊँ। इस सेक्स के लिए मैं बहुत तड़फ़ी थी। जब मेरी उम्र बीस साल की थी तब मैंने पहली बार सेक्स किया था। तब मेरे पास चूत थी आज मेरे पास भोसड़ा है। अब मैं आपको अपनी पहली चुदाई कहने जा रही हूँ तो आप सब लोग अपना हथियार पकड़ कर रखना क्यूंकि यह कहानी पढ़कर आप सब लोगों के हथियार में से पानी निकल जायगा।
कहानी उन दिनों की है जब मैं अपने मामा के घर गई थी। मामा के परिवार में मामा-मामी और उसका बड़ा बेटा निखिल हैं। निखिल की उम्र भी बीस साल की थी। जब मैंने उसको देखा तो देखती ही रह गई, क्यूंकि उसकी बॉडी बहुत सेक्सी थी जिस पर हर लड़की मर-मिटे।
मैंने उसे चुदवाने की ठान ली। मेरा फिगर 34-26-36 है। वो भी मुझे देखता ही रह गया और मुझसे बातें करने लगा, मेरे करीब आने लगा। वो मेरे बदन को निहारने लगा, मैं उसके सामने कई बार झुक जाती और वो मेरे वक्ष को देखने लगता इस तरह मैं उसे अपने जाल में फ़ंसाने लगी।
हम रात को एक ही कमरे में सोते थे। जब हम रात को सोने गए तब थोड़ी देर बात की और सोने की तैयारी करने लगे।
मैंने उसे पूछा- तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड है?
तो उसने जवाब में मना किया और बोला- तुम मेरी गर्ल फ्रेंड बन जाओ।
मैंने हाँ कर दी। तो उसने मेरे गालों को चूम लिया। मुझे बहुत अच्छा लगा और मैं उसके होंठों को चूमने लगी और वो भी मेरे होंठों को जोर से चूमने लगा। मुझे पता भी नहीं चला कि कब मेरे कपड़े उतार लिए। वो मेरे स्तनों को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा। फिर उसने ब्रा को भी अलग कर दिया और मेरे चुचूकों को चूमने लगा। मेरे बदन में चींटियाँ रेंगने लगी। बाद में उसने अपने कपड़े भी उतार दिए। मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया और चूमने लगी।
उसने मेरी पेंटी उतार दी और मेरी चूत को चाटने लगा। मुझे बहुत मजा आने लगा और मैं उसके मुँह में ही झड़ गई। वो मेरे रस को चाटने लगा फ़िर अपना लंड मेरी चूत पर फिराने लगा। एक झटके में उसका आठ इंच का लंड मेरी चूत में आधा घुस गया। मैं चिल्लाने लगी तो उसने मेरे मुँह पर अपना मुँह रख दिया। दूसरे झटके में पूरा लंड घुसा दिया और मुझे चोदना शुरु कर दिया। मैं भी कमर उठा कर उसका साथ देने लगी और मेरे मुँह से आहऽऽ आआआ ऊऊऊऊ म्म्म्म्म्म्म्ममअहहहहह की आवाजें निकलने लगीं ! जोश के कारण मैं बोलने लगी- और चोदो ! और चोदो ! और चोदो !
उसने कहा- ले रांड ! और ले ! खा मेरा लंड !
फिर उस ने मुझे कुतिया बनाया और मुझे खूब चोदा! फिर वो झड़ने वाला था तो उसने मुझसे कहा- मैं झड़ने वाला हूँ !
उसके झड़ने से पहले ही मैं तीन बार झड़ चुकी थी तो मैंने उसे कहा- मेरी चूत में ही झड़ जाओ !
वो मेरी चूत में ही झड़ गया।
उस रात मैं तीन बार चुदी और उसने मेरी गांड भी मारी।

मकान मालिक की लड़की

प्रेषक : राहुल गुप्ता
दोस्तो, मेरा आप सभी को प्रणाम ! मैं राहुल गुप्ता भोपाल का हूँ। मैं अपनी सच्ची कहानी बता रहा हूँ।
तो बात उस समय की है जब मैं कॉलेज़ में पढ़ता था। मेरी आयु 20 साल थी। मैंने किराए पर कमरा लिया हुआ था। मेरे मकान मलिक की एक लड़की थी 18 साल की होगी। वो रोज़ कॉलेज़ में मिला करती थी और मैं उसे बहुत देखा करता था। मुझे उसके सेक्सी गोल-गोल वक्ष टॉप के ऊपर से बड़े अच्छे लगते थे, स्तन 32 इन्च के तो होंगे। और उसके चूतड़ तो क्या कहिए ! मानो स्वर्ग है!
एक दिन मैं उसे कॉलेज़ में बोला- आप मुझसे बात क्यों नही करती ?
वो बोली- मेरी आदत नहीं !
मैं बोला- आदत तो बदलनी पड़ती है तभी लाइफ का मज़ा है !
वो बोली- कैसा मज़ा? मुझे समझ नहीं आया !
मैं बोला- आ जाएगा बाबा !
एक दिन उसके घर पर कोई नहीं था। मैं ऊपर गया, बोला- अंकल हैं?
तो कोई आवाज़ नहीं आई। मैं बोला- अंकल !!
तो अंदर से आवाज़ आई- घर पर नहीं हैं !
और वो दरवाजा खोल कर बाहर निकली।
मैंने कहा- क्या कर रही हो?
वो जीन्स और टाईट टॉप पहने थी, बड़ी सेक्सी लग रही थी।
मैं बोला- मैं आ सकता हूँ अंदर?
बोली- क्यों नहीं ! आओ !
मैं बोला- आज सब कहाँ गये?
बोली- मार्केट !
मैं बोला- ओके ! अकेले क्या कर रही थी ?
बोली- कुछ नहीं ! नेट पर थी !
तो मैंने देखा तो याहू मैसेन्जर खुला था और वैबकैम पर एक लड़का नंगा था।
मैं बोला- आपको यह सब पसंद है?
बोली- थोड़ा-थोड़ा !
मैं बोला- कभी किया है?
बोली- नहीं !
मैं बोला- तो आज करते हैं !
बोली- क्या बेहूदा बात करते हो !
मैं बोला- तब कैसे पता चलेगा कि कैसा लगता है ?
लेकिन उसका मन तो हो ही गया था। वो बाथरूम में गई और जब लौटी तो उसके स्तन तने थे। मैं समझ गया कि लड़की गर्म हो गई है।
मैंने उसे पकड़ कर ज़ोर से अपने से चिपका लिया और चूमने लगा।
बोली- क्या कर रहे हो राहुल ? मत करो ! मुझे डर लग रहा है ! कोई आ ना जाए !
मैं बोला- चिन्ता मत करो, दरवाजा लॉक है जी कोई नहीं आएगा।
और हम फिर बेडरूम में चले गये। मैंने उसका टॉप उतार दिया। वो गुलाबी ब्रा पहने बड़ी सेक्सी लग रही थी। उसके स्तन आज़ाद होने को तड़फ़ रहे थे।
मैने उसकी जीन्स भी उतार दी। वो नेट थोंग पैंटी पहने थी। नेट से हल्के छोटे छोटे बाल दिखा रहे थे, बड़ी सेक्सी लग रही थी पैंटी में !
मैने अपने भी कपड़े जल्दी से उतार दिए और मैं उसके स्तन चूसने लगा। धीरे से ब्रा का हुक खोल कर मैंने ब्रा उतार दी और फ़िर पैंटी भी !
अब हम दोनो नंगे थे। वो मेरा लंड जो 8 इंच का था, उसे ऊपर-नीचे कर रही थी और चूस रही थी, मैं उसकी फुद्दी को चाट रहा था।
मैंने उसे सीधा लिटाया और जैसे ही उसकी चूत पर लण्ड पर रखा तो वो सी सी सिस सी अहहहहहहः की आवाज़ निकालने लगी।
मैने झटके से लंड को अंदर डाल दिया।
वो चिल्ला उठी, बोली- मत करो राहुल ! दर्द हो रहा है ! मैं मर जाउंगी !अहाआआआ हाआआआ अहहहहहहहा ओह ओऽऽ
और मैं अब उसकी चूत में ही झड़ गया और उसने भी पानी छोड़ दिया। हम दोनों 30 मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे। फिर उठे और दोनों बाथरूम में जाकर नहाए। मैंने उसे ब्रा-पैंटी पहनाई और फ़िर अपने कमरे में आ गया।
अभी भी मैं वहीं रहता हूँ। अभी तक उसे मैं चार बार चोद चुका हूँ।